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हरी भिंडी की जगह अब खाइये लाल भिंडी, इसके फायदे जानेंगे तो खुशी से नाच उठेंगे

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 हरी भिंडी की जगह अब खाइये लाल भिंडी, इसके फायदे जानेंगे तो खुशी से नाच उठेंगे लाल रंग की भिंडी शायद ही कभी आपने देखी या सुनी हो। यह होती है बड़े काम की। खासकर आंखों के लिए। सीएसए में विकसित नई प्रजाति की भिंडी सबसे अलग होगी। इसमें म्यूसीलेज यानी चिपचिपापन कम होगा। इसके लिए विटामिन ए, बीटा, कैरोटीन और एंटी ऑक्सीडेंट भरपूर होंगे। साथ ही ये भिंडी मोतियाबिंद को बेअसर करने में भी सहायक होगी। लाल भिंडी में सोडियम एकदम नहीं होगा। साथ ही पोटैशियम की मात्रा अधिक होगी। यह शरीर के तंत्रिका तंत्र के लिए बेहद फायदेमंद है। लाल भिंडी की उत्पादकता भी अधिक होगी। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के सब्जी विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक डॉ. अजय यादव का। उन्होंने बताया की अभी तक भिंडी की कई प्रजातियां विकसित हो चुकी हैं। उन सबसे लाल भिंडी अलग है। कहते हैं कि गर्भावस्था में भिंडी का सेवन लाभदायक होता है। इसमें फॉलेट नाम का एक पोषक तत्व पाया जाता है, जो भ्रूण के मस्तिष्क के विकास में अहम भूमिका निभाता है। भिंडी से आप कैंसर को भी दूर भगा सकते हैं। खासतौर से कोलन (आंत) कैंसर को दूर क...

कलेक्टरों को जारी किये गए निर्देश: अतिवृष्टि एवं बाढ़ से हुई फसलों को क्षति का इस तरह सर्वे कर जल्द भेजें रिपोर्ट

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खरीफ फसलों की क्षति का सर्वेक्षण  देश में इस वर्ष मानसून से सामान्य बारिश हुई है परन्तु कुछ राज्यों में कम समय के अन्दर अधिक बारिश के चलते बाढ़ की स्थिति बन गई थी जिससे खरीफ फसलों को काफी नुकसान हुआ है | ऐसे में राज्य सरकारों द्वारा किसानों को मुआवजा देने के लिए सर्वे का कार्य किया जा रहा है ताकि किसानों को उचित मुआवजा दिया जा सके | छत्तीसगढ़ के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव तथा राहत आयुक्त सुश्री रीता शांडिल्य ने प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टरो को पत्र जारी कर मानसून 2020 के दौरान जिलों में अतिवृष्टि तथा बाढ़ आदि कारणों से खरीफ की फसलों की क्षति की जानकारी शीघ्र निर्धारित प्रपत्र में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।  राजस्व सचिव ने कलेक्टरों को लिखे पत्र में कहा है कि अतिवृष्टि बाढ़ आदि कारणों से फसल क्षति होने पर प्रभावित कृषकों को आर्थिक अनुदान सहायता उपलब्ध कराए जाने के लिए फसल क्षति का सही आंकलन अत्यंत आवश्यक है क्योंकि राहत राशि का मापदण्ड निर्धारित करने के प्रयोजन के लिए क्षति का प्रतिशत कृषक द्वारा यथा स्थिति फसलों के अंतर्गत बोये गए कुल क्षेत्र के आधार पर परिमाणित...

मशरूम की खेती करने वालों के लिए बढ़िया मौका, ऑनलाइन ट्रेनिंग लेकर शुरू कर सकते हैं खेती

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तीन दिन के ऑनलाइन प्रशिक्षण में मशरूम की खेती से लेकर बाजार में बेचने तक की जानकारी दी जाएगी, साथ ही मशरूम की खेती को लेकर चल रही सरकारी योजनाओं की भी जानकारी मिलेगी। अगर आप भी मशरूम की खेती शुरू करना चाहते हैं तो ये बढ़िया मौका है, घर बैठे ऑनलाइन प्रशिक्षण लेकर आप भी मशरूम की खेती शुरू कर सकते हैं। पिछले कुछ साल में बाजार में मशरूम की मांग बढ़ी है, लेकिन जिस तरह से बाजार में मांग है, उतना उत्पादन नहीं हो पा रहा है। ऐसे में किसान मशरूम की खेती से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।  गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, का मशरूम अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र 09 से 11 सितम्बर को तीन दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है, जिसमें बटन, ढिगरी पुआल मशरूम और दुधिया मशरूम की खेती की जानकारी मिलेगी। मशरूम अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र के संयुक्त निदेशक डॉ. केपीपीएस कुशवाहा बताते हैं, "कोरोना के चलते इस बार ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जाएगी, इससे हर बार जो किसान नहीं पहुंच पाते थे, ऑनलाइन माध्यम से ज्यादा लोग जुड़ पाएंगे। अभी सितम्बर में तीन दिन का ट्रेनिंग प्रोग्राम है, अगर लोगो...

बारिश से अगैती गोभी की पौध को नुकसान

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  लगातार तीन दिन से हो रही बारिश सर्दियों के सीजन में आने वाली सब्जियों की पौध को नुकसान पहुंचा रही है। खेतों में पानी भरने से फूल गोभी की पौध को नुकसान पहुंचा है। सब्जी उत्पादों का कहना है कि यदि और बारिश होती है तो फूल गोभी और टमाटर की पौध खराब हो जाएगी, नुकसान उठाना पड़ेगा। अमरोहा के आस-पास गांवों में बड़े पैमाने पर सब्जियों की खेती की जाती है। सर्दियों के दिनों में आने वाली फूल गोभी, टमाटर पालक समेत अन्य फसलों की तैयारी शुरू हो गई है। फसल तैयार करने के लिए फूल गोभी और टमाटर की पौध उगाई गई है। लेकिन बारिश के चलते खेतों में पानी भरने से फूल गोभी और टमाटर की पौध के खराब होने का खतरा बढ़ गया है। बारिश के चलते गोभी की पौध पीली पड़ने लगी है। सब्जी उत्पादों का कहना है कि यदि अब और बारिश होती है तो फूल गोभी और टमाटर की पौध खराब हो जाएगी। नुकसान उठाना पड़ेगा। बारिश के चलते पालक समेत अन्य सब्जियों की फसलों को भी नुकसान पहुंचा रहा है। हालांकि जिला कृषि अधिकारी राजीव कुमार सिंह ने अभी स्थिति चिंताजनक होने से इनकार किया। #khetkhaliyan #farmers #agriculture #up

कृषि से जुड़े 112 स्टार्टअप को 1186 लाख रुपये देगी मोदी सरकार, ये होगा फायदा

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राष्ट्रीय कृषि विकास योजना-रफ्तार के तहत दी गई है 112 स्टार्टअप को आर्थिक मदद, किसानों की आय बढ़ाने में होंगे मददगार.       तकनीक के जरिए खेती-किसानी को आसान बनाने की कोशिश नई दिल्ली.  मोदी सरकार (Modi Government) ने किसानों की आय (Farmers Income) बढ़ाने और युवाओं को रोजगार अवसर प्रदान करने के लिए कृषि क्षेत्र के स्टार्ट-अप्‍स को प्रोत्साहित करने की नीति बनाई है. राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY)-रफ्तार के तहत ‘नवाचार और कृषि-उद्यमिता विकास’ कार्यक्रम को अपनाया गया है. इसके पहले चरण में 112 स्टार्टअप (Startup) को 1186 लाख रुपये की रकम दी जाएगी. केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने इस बात की जानकारी दी है. आरकेवीवाई योजना कृषि एवं संबंद्ध क्षेत्रों में सार्वजनिक निवेश बढ़ाने के लिए राज्‍यों को प्रोत्‍साहित करती है. तोमर ने बताया कि इन स्टार्ट-अप को 29 एग्रीबिजनेस इंक्यूबेशन केंद्रों में 2-2 महीने की ट्रेनिंग दी गई है. ये स्टार्ट-अप युवाओं को रोजगार प्रदान करेंगे व प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से किसानों की आय बढ़ाने में भी मददगार साबित होंगे. उन्होंने कहा, कृषि ...

जीवामृत क्या है? जीवामृत बनाने की सबसे अच्छी विधि

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किसान भाइयों आज हमे  जीवामृत  से खेती करने की बहुत ही आवश्यकता है। क्योंकि हरितक्रांति के बाद से ही भारतीय खेती मे जिस प्रकार रसायनिक उर्वरको का आंख बंद कर के बड़ी भारी मात्रा मे प्रयोग हुआ है उसने हमारी भूमि की संरचना ही बदल कर रखदी है। आज बहुत ही तेजी से खेती योग्य भूमि बंजर भूमि में बदलती जा रही है। और लाखों करोड़ रुपया किसानों का रासायनिक उर्वरकों पर खर्च हो रहा है। खेतो मे लगातार रासायनिक उर्वको के प्रयोग से फसल की पैदावार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। अधिक खर्च और कम उत्पादन के कारण ही किसान भाई कर्ज से दबे हुए है। साथ ही हमारे खाने से होकर ये जहर हमारे स्वास्थ्य को भी खराब कर रहा है। इन सभी समस्याओं के समाधान के लिए जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। जैविक खेती के अंतर्गत किसानों के पास उपलब्ध संसाधनों से ही कहती करके अधिक पैदावार लेना है। जैसे रासायनिक उर्वरकों की जगह अधिक से अधिक जैविक खादों का प्रयोग करना। जिनमे कम्पोस्ट खाद, वर्मीकम्पोस्ट, जीवामृत,गोमूत्र आदि का प्रयोग करना है। इस लेख में हम जीवामृत के बारे में जानकारी दे रहे है। जिसे किसान भाई कम लागत मे अपने ही ...

बिहार के सहकारी बैंकों से लोन लेने वाले किसानों के लिए Good News, लोन हो सकता है माफ!

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बिहार के सहकारी बैंकों से लोन लेने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है। अगर लोन खाता एनपीए हो गया है तो जल्द उनको कुछ राहत मिलने वाली है। सहकारी बैंक ऐसे खातों को बंद करने के लिए जल्द ही एकमुश्त भुगतान योजना (ओटीएस) लाने वाले हैं। सहकारी बैंकों ने ओटीएस योजना अपने बोर्ड से पारित करा लिया है, लेकिन कोरोना को लेकर इसे अभी लागू नहीं किया जा रहा है। उम्मीद है किसानों की फसल कटने पर नवम्बर या दिसम्बर में यह योजना लागू होगी। इस योजना से लगभग ढाई लाख ऐसे लोनधारकों को लाभ होगा, जो समय से पैसा नहीं भुगतान कर सके हैं। इसमें सबसे ज्यादा केसीसी लेने वाले किसानों की संख्या है। बैंक ने लोन का 70 फीसदी से लेकर पूरा सूद माफ करने करने तक की योजना बनाई है। इसका सेटलमेंट आधार अवधि पर तय किया जाएगा। ऐसे खाते जो छह साल से लॉस एसेट घोषित कर दिये गये हैं। यानी उन खातों को जिन्दा रखने से बैंक को रोज घाटा हो रहा है, उनको इस योजना का लाभ मिलेगा। इसके अलावा ऐसे लोन खाताधारकों को भी लाभ मिलेगा, जो बैंक की नजर में संदेहास्पद हो गए हैं। उनकी गणना तीन से छह साल के आधार पर की जाएगी। पूरी गणना के बाद एकमुश्त राशि जमा करन...